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पूज्य पिताजी श्री M.R. Gour और माताजी श्रीमती जेठीदेवी की तीसरी संतान के रूप में परमाणु विस्फोट स्थल पोकरण (जैसलमेर) में 31 जनवरी 1983 में जन्म हुआ |

ब्राह्मण कुल में जन्म लेने की वजह से तीक्ष्ण बुद्धि और संस्कारो की खाद ने पल-पल धार्मिक और सामाजिक जीवन के लिए चेतना भरी |

अपने बाल्यकाल में स्काउटिंग, खेलकूद, प्रतियोगिता, नाटको में भाग लिया | स्काउटिंग के जरिये मारवाड़ का प्रसिद्ध मेला – “रामदेवजी का मेला-” रुणिया में पानी पिलाना, वाहनों की जैसी ड्यूटी के द्वरा सेवा भाव बलवंत होते गये |

अपनी शिक्षा के साथ शैक्षणिक गतिविधियों का कोई अवसर नहीं छोड़ना यह प्रयास रखा | नेशनल क्रेडिट कोर (NCC) और रास्ट्रीय सेवा योजना (NSS) रहते हुए | सामाजिक एवं परोपकारी कार्यो में हिस्सा लिया | हॉस्पिटलों की सफाई करना | मलेरिया के समय DD व छिडकाव करना जेसे कार्य किये |

समय गुजरा ख्याति प्राप्त सेवा संघठन में रहकर समपर्ण भाव से कार्य किया | सेवा गुरु और संतो का भरपूर आशीर्वाद मिला | जिसकी वजह से परहित के भाव दिन-प्रतिदिन दिनचर्या में आ गये |

इन सब सेवाओ के साथ अधय्नन का भी पूरा ध्यान रखा | महर्षि दयानंद नन्द सरस्वती यूनिवर्सिटी से उर्दू में स्नातक किया | तथा “समाजशास्त्र” से प्रथम श्रेणी में “मास्टर ऑफ़ आर्ट” की डिग्री प्राप्त कर रखी है |

हर नये प्रोजेक्ट को पुरे मनोयोग और समर्पण भाव से करना आदत सी है | यह गुण अपने पिताजी से अपने भीतर आये है | पूज्य पिताजी आज 75 वर्ष की उम्र मै भी अपने समस्त काम स्वयं करते है साथ ही सुबह से घर पर लगी दु:खी दर्दिजनो की लाइन को नि:शुल्क उपचार देते है | नाडी वेध और हनुमंत लालाजी के ईस्ट की वजह से नजर और भूतप्रेत बाधाओं से निजात देते है | जो दु:खी जन आते है तो पिताजी परिवार वालों को दूध-चाय,कॉफी , पानी के लिए सेवा में लगा देते है |

“समाज के उत्थापन के लिए समाज सेवियों को करना ....धर्म का असली मायना समाज को बताना... आदर्श परिवार.....अनुकरणीय प्रकल्यो के माध्यम से हिंदुस्तान का गौरव बढ़ाना है | हर व्यक्ति को ईश्वरीय शक्ति का अहसास कराना है | आदमी के लिए जीने की प्रेरणा देने का संकल्प है | अपने विचारों,लेखों एवं कार्यो के डाटा |

इन सब कार्यो एवं पूज्य पिता जी , माताजी , सेवा गुरुओ , और संतो – आचार्यो का आशीष सानिध्य निरंतर सेवा में जुड़े रहने हेतु प्रेरणा देता है | अनंत कृपा हो प्रभु कि जिसकी वजह से सेवा पथ पर अग्रसर होने का अवसर मिल रहा है |



कोटि कोटि नमस्कार है | प्रभु की कृपा बरसाने के लिए |